Tuesday, 13 December 2022

मृत्यु क्या है।शरीर से प्राण कैसे निकलते हैं। मनुष्य के प्राण कैसे निकलते हैं ।आत्मा शरीर कैसे छोड़ती है l sharir se pran kaise nikalta hai.

 हेलो फ्रेंड्स आप सब केसे हो । आज की इस पोस्ट हम बात करने वाले है की।मनुष्य के प्राण कैसे निकलते हैं ।  आत्मा शरीर कैसे छोड़ती है ।अगर आप भी जानना चाहते हो तो इस पोस्ट को लास्ट । तक जरूर पढ़े।





 मृत्यु क्या है।शरीर से प्राण कैसे निकलते हैं। मनुष्य के प्राण कैसे निकलते हैं ।आत्मा शरीर कैसे छोड़ती है l sharir se pran kaise nikalta hai.


 मित्रो कभी अपने आंखो के सामने किसी की मृत्यु होते जरूर देखी होगी और वहां मौजूद लोगों को यह भी कहते सुनाओ। 


जब उसके प्राण निकल गए हैं और उसकी मृत्यु हो चुकी है। पर तू क्या आपने कभी? जाने की कोशिश की है कि आखिरकार यह प्राण अर्थात आत्मा शरीर से कैसे बाहर निकलती है? 


यदि नहीं तो कोई बात नहीं हमारी आज की इस पोस्ट में आपको इस प्रश्न का उत्तर जरूर मिल जाएगा, जिसका वर्णन गरुड़ पुराण में किया गया नमस्कार मित्रों स्वागत है। आपका एक बार फिर love is lifes.com  पर मित्रों जैसा कि आप सभी जानते ही हैं। 


क्यों मनुष्य के जीवन का वह कड़वा सच है जिसे बड़े से बड़ा ज्ञानी भी स्वीकार नहीं करना चाहता जबकि वह जानता है कि 1 दिन सभी की मृत्यु होना तय है। 


और जो मनुष्य इस सच को स्वीकार कर लेता है वह बुद्धिमान कहलाता है। 


तो चलिए आप जानते हैं कि आत्मा शरीर से कैसे बाहर निकलती है और? 


इसके पीछे की प्रक्रिया क्या है? गरुड़ पुराण के नौवें अध्याय में वर्णन किया गया है कि मनुष्य के मुख? 


दोनों नेत्र  दोनों नासिका रणधार तथा दोनों कान साथ ऐसे क्षेत्र अर्थात ऐसे द्वार। 

बताया गए हैं जिनमें से किसी एक द्वार से सुकृति अर्थात पुण्यात्मा के प्राण निकलते हैं अब! 


अपान अर्थात गोदा से बाहर निकलने वाली वायु से मिले हुए प्राण जब प्रथक हो जाते हैं तब प्राण वायु सूक्ष्म कर शरीर से बाहर निकलती है। 


इसके अलावा यदि आप पर कभी ध्यान दिया हो तो मरते हुए व्यक्ति के सबसे पहले पैर ठंडे पढ़ते हैं उसके बाद घुटने के नीचे का हिस्सा। 


ऐसी करती करती हो, उस व्यक्ति का पूरा शरीर ठंडा पड़ने लगता है  मानो जैसे ऊर्जा सिमट रही हो 


अन्त तथा संपूर्ण चेतना समिति हुई एक चक्र पर आकर एकत्र हो जाती है। जिस चक्र पर आप सबसे ज्यादा जी है जैसे कि ध्यान योगी ओरछा मुख्य रूप से ज्ञान चक्र से निकलती है। 


और इसके विपरीत जो लोग अपनी पूरी जिंदगी ध्यान से दूर रहे हैं और जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन खानपान और सांसारिक सुख के लोग में ही बता दिया हो। ऐसे मनुष्य के प्राण मणिपुर चक्र से निकलते हैं। 


वही ऐसे मनुष्य जिन्होंने अपने पूरे जीवन में केवल संभोग के बारे में ही सोचा है। ऐसा मनुष्य अपने अंतिम समय में इसके बारे में ना सोचे। 


तो संभव ही नहीं प्रणाम स्वरूप ऐसे व्यक्ति की ऊर्जा मूलाधार चक्र से बाहर निकलती है 


इसी! के साथ जिन मनुष्यों का संपूर्ण जीवन ज्ञान के इर्द-गिर्द पीता हो ऐसे मनुष्यों की ऊर्जा गला चक्र अर्थात विश्व युद्ध। 


चक्र से निकलती है ऐसे ही जो मनुष्य अंतिम समय में अपने इष्ट की आबरू को याद करते हुए प्राण त्याग ते हैं। उनकी ऊर्जा आंखों से निकलती है और अंत में वह मनुष्य आते हैं जिनकी।


 उर्जाक्सहस्त्रार चक्र से निकलती है, ऐसे मनुष्यों को बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है क्योंकि शरीर त्यागने के सबसे उचित मार्ग माने जाने वाले सहस्त्रार चक्र से निकलने वाली आत्मा को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है


इसी के साथ प्राण निकलने के संदर्भ में और भी बहुत सी बातों का वर्णन करोड़ पुराण में मिलता है जिसके अनुसार प्राण त्यागने के समय मनुष्य को अन्य संत त्याग। 



अर्थात अन्ना और जल का त्याग करना चाहिए और यदि वह वक्त आ सकती रहे। तू जन्मा हो तो उसे आप तो सन्यास लेना चाहिए। आप और सन्यासी अभिप्राय है एक ऐसा सन्यास जो सांसारिक जीवन से दुखी होने पर जल्दी से ग्रहण। 


क्या चाहता है प्राण की गले तक आने पर जो मनुष्य मैंने सन्यास ले लिया है। ऐसा बोलता है। वह मृत्यु के बाद विष्णु लोक को प्राप्त होता है और ऐसे! 


मनुष्य का जन्म अब दोबारा इस धरती पर नहीं होता जो व्यक्ति मृत्यु से। 


पूर्व कथित सभी कार्य कर लेता है। मृत्यु के समय ऐसे व्यक्ति के प्राण ऊपर के क्षेत्रों से सुख पूर्वक निकलते हैं। 


साथी ही  योगियों के संदर्भ में गरुड़ पुराण में बताया गया है कि योगियों के प्राण का तरु अंदर से निकलते हैं। गरुड़ पुराण में शरीर दे ईश्वर रूपी प्राणवायु से निकलने के बाद। 


शरीर की तुलना एक ऐसे वृक्ष से की है जिसका आधार ना होने के कारण वह गिर गया हो। क्या आप जानते हैं प्राण से मुक्त होने के बाद शरीर तुरंत ही चेष्टा चुने? 


गणित दुर्गंध युक्त स्पर्श और सभी के लिए जनहित हो जाता है। मृत शरीर की तीन अवस्थाएं होती हैं। कीड़ा, निष्ठा और बस रूप से आप ऐसे समझ सकते हैं। शरीर में कीड़े पड़ते हैं। वह मल के समान दुर्गंध युक्त हो जाता है और अंततः चिता। 


अमित जलकर भस्म हो जाता है इसलिए क्षणभर में नष्ट होने वाले इस शरीर पर गर्व करना अनुचित है। मृत्यु के पश्चात पंच भूतों से निर्मित इस शरीर का। 


पृथ्वी तत्व, पृथ्वी, जल, तत्व, जल 336 और वायु तत्व वायु में लीन हो जाता है परंतु सभी प्राणियों के शरीर में स्थित सर्वव्यापी शिव स्वरूप और जगत साक्षी आत्मा ही एक। 


मात्र ऐसी चीज है जो कि अजर अमर है जिसका कोई अंत नहीं है जो एक शरीर को त्याग कर दूसरे शरीर में प्रवेश कर लेती है। 


मृत व्यक्ति के शरीर से निकली आत्मा अपने पुराने शरीर से निकलकर अपने कर्म कोष में इकट्ठा हुए कर्मों द्वारा निर्मित नए शरीर में प्रवेश करती है।


 गरुड़ पुराण में इस तथ्य को कुछ इस प्रकार समझाया गया है जैसे एक घर के जल जाने पर उसमें रहने वाला व्यक्ति जाकर दूसरे नए घर में रहने लगता है। उसी प्रकार आत्मा भी पुराना शरीर छोड़कर नया शायरी। 


ग्रहण कर लेती है। तत्पश्चात उस आत्मा को लेने छोटी-छोटी घंटियों की मालाओं से सुसज्जित विमान को लेकर देवदूत आकाश से उतरते हैं।


 धर्म को जानने वाले धार्मिक और बुद्धिमान लोगों के प्रिय यह देवदूत उनकी कृतियों के अनुसार आत्मा को स्वर्ग लेकर जाते हैं। 


जाति विधि धारण कर निर्मल, वस्त्रों, स्वर्ण और रत्नों से सुसज्जित जीव का स्वागत देवताओं द्वारा किया जाता है। 


गरुड़ पुराण में इसके अतिरिक्त कुछ विशेष परिस्थितियों का भी वर्णन किया गया है जिसके अनुसार भी व्यक्ति जिनकी मौत अचानक या फिर हिंसात्मक तरीके से होती है, ऐसे व्यक्तियों की आत्मा इन सब से कुछ अलग तरीके से अपना शरीर छोड़ती है 



इसी के साथ ऐसे व्यक्ति जिनकी मृत्यु लंबी बीमारी के बाद होती है तो इस दौरान उनके शरीर की ऊर्जा का क्षय तब तक बहुत कम हुआ होता है।




 इसी कारण ऐसी आत्मा शरीर छोड़ते समय काफी दुविधा में होती है। इसलिए ऐसी आत्मा का किसी भी अंग से निकलना निश्चित नहीं होता।



 मित्रों यदि आप वर्णित विशेष परिस्थितियों में आत्मा कैसे शरीर छोड़ दी है। इस बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।



जय हिन्द जय भारत

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