Wednesday, 14 December 2022

आत्मा गर्भ में कैसे आती है। गर्भ में आत्मा कैसे प्रवेश करती है?आत्मा गर्भ में कैसे आती है?

हेलो दोस्तो आप सब केसे है। आज की इस पोस्ट में हम बात करने वाले हैं कि ।गर्भ में आत्मा कैसे प्रवेश करती है। गर्भवती महिला के शरीर में दो आत्माएं रहती है तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़े ताकी आपको पूरी जानकारी मिल सके




आत्मा गर्भ में कैसे आती है। गर्भ में आत्मा कैसे प्रवेश करती है?आत्मा गर्भ में कैसे आती है?


मित्रो ए तो जाहिर सी बात है की पृथ्वी की मनुष्य के शरीर मे एक आत्मा का बास होता है और ए तो हम आपको पहले ही बता चुके हैं की एक मनुष्य के शरीर में आत्मा किस प्रकार प्रवेश करता है और किस मार्ग से निकलती हैं । परंतु मित्रो अपने अक्सर घर के बड़ो द्वारा एक गर्वबाती महीला को ए कहते हुवे सूना होगा की अपना खयाल रखा करो अब तुम अकेली नही हो तुम्हारे गर्व में एक जीवन और भी  पल रहा है । यदि अपने ए सुना है  तो क्या आपके मन में भी ए विचार उठा । की क्या एक गर्ववाती महिला के शरीर में सचमुच में दो आत्मयो का वास होता है । अगर हां ।तो  आईए जानते है । इस प्रश्न का उतर आज की इस पोस्ट में ।। नमस्कार और सोवागत है अपका । Love is lifes .com पर।


आप ए भी देखे







मित्रो भगवान  विष्णु के भक्ति और उनके ज्ञान पर आधारित गरुड़ पुराण में  हमारे एक और प्रश्न का उत्तर मौजूद है ज्यादातर लोगों को ही लगता है गरुड़ पुराण में सिर्फ मृत्यु से पहले और बाद के स्थिति बारे बताया गया है लेकिन इसके अलावा बहुत सी ज्ञान। विज्ञान निधि नियम धर्म के बाते भी मीहित है ।




  गरुड़ पुराण के छठे अध्याय में नर्क में आया हुआ जीव मां के गर्व में केसे उत्पन्न होता है । वे गर्व बास आदि के दुखों को किस प्रकार भोगता है इन सभी प्रोसनो का उतर विस्तार रूप में फरमित है ।


जिसमें स्पष्ट  सब्दो आत्मा के गर्व के प्रवेश करने की प्रक्रिया को बताया गया है इस बात को प्रभावित करता है कि एक गर्भवती महिला की शरीर में एक नहीं बल्कि दो आत्माओं का निवास होता है तो आइए इस बारे में संस्कित में आपको बताते है ।



गरुड़ पुराण के अनुसार गर्भधारण करने के समय माता पिता के भाव के अनुसार उनके  आसपास  एक सूक्ष्मस बंधन क्षेत्र वाला  तैयार होता है ।   ए क्षेत्र मुख्यते उन्ही आत्मायो को अपनी और आकर्षित करता है जिसका स्पंदन उस से मिलता जुलता हो इसके बाद यो   जिसको भी   वह आकर्षित करता है  यो मां के गर्व आसपास ही मडरआती रहती है तथा समय अनुमासिक  प्रक्रिया शुरू हो जाती है ।


लेकिन गर्व के आसपास रहने से यह आत्मा महत्वपूर्ण हो जाती है और वह अपना बल लगाना शुरु कर देती है जिससे जीव कुशो  के विबाजन की गति पर  प्रवाव डालता है और उनकी गति को बड़ा देता है।




। इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण  अंग जिसका गठन होता है वह हिरदे है और  इसके पश्चात हिर्दे के बाकी को अंगो को भी पोषण मिलने लगता है 



योगिक विज्ञान की माने बाकी शरीर के साथ साथ  आदर्श शरीर का भी विकास होता हैं और प्राण सकती अर्थात आत्मा के बहाव के लिए एक संचार का मार्ग  उत्पन्न होता है जहां ऐसे कई सारे मार्ग मिलते हैं और वहां ऊर्जा का भवर बन जाता है अध्यात्म में इन्हें चक्र और बिंदू कहते है हालाकिक योगी परम परयो में इन्हें 7 चक्र के रूप में जाना जाता है जो की इस प्रकार है

 





मुलादार ।सवस्तिधार मणिपुरक अनार्त विश्वदी अज्ञान और शस्त्रतर । बताया गया है जब ब्रूना तैयार हो जता है ।उसमे सिर का गठन बली बनती हो जाता हे तो इसके प्रचात बर्मभ अनजान का सूर्य होता है सायाद अपको पता हो की सिर को कपाल चित्र को बर्म्भआंध्र कहा जाता है और इसे अदायत के अनुसार 7चक्र में से एक और बरवा बिंदु माना गया है जिसेसे बर्म्भ अर्थ सुजीत हो जाता है तब आत्मा उसी बरवे बिंदु से प्रवेश हो जाता है





और ए सम्पुन प्रक्रिया  बर्न के बिकिसित होने से तीन माह के अंदर अंदर ही हो जाती है ।लेकिन ए बात ध्यान में रखने वाला है की मां के गर्व में आत्मा तीन महिने पूर्ण होने के बाद ही प्रवेश कर पाती है इसलिए ए कहता है गलत नही होगा  की गर्व अरन के तुरंत बाद मां के शरीर में उसे अतलित किसी और आत्मा का वास नहीं होता हां लेकिन 3 महीने पूर्ण होने तक मां के गर्भ में आत्मा प्रवेश कर चुकी होती है अगर आप यह जानना चाहते हैं आत्मा 3 महीने बाद ही गर्व  में प्रवेश क्यों करता है  to niche commet box me comment kar ke hume jarur bstye ।


यही नहीं गरुड़ पुराण  के 10 अध्याय में इस बात का प्रमाण मौजूद है जहां पर गर्भवती महिलाओं के अंतिम संस्कार की विधि बताई गई है जिसमें स्वस्थ  रूप से बोला गया है हो चुकी है गर्भवती महिला में दो आत्माएं होती है एक ओ स्वयं स्त्री की दूसरी उसकी गर्व में मौजूद उसकी शिशु की इसीलिए उनके अंतिम संस्कार के विधि मैं भी दोनो के अलग-अलग अंतिम संस्कार की बात कहीं गई है ताकि दोनों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो सके इसकी संपूर्ण विधि के बारे में जानने के लिए दूसरी पोस्ट देखें।।


इन सबके अलावा गरुड़ पुराण में भगवन  विष्णु ने यह भी बताया है कि जब शिशु को 6 माह को  हो जाता है तब वह भूख और प्यास का महसूस करने लगता है और माता के गर्भ मैं अपना असनान  बदलने के लायक भी हो जाता है इसके अतिरिक्त शिशु द्वारा गर्भधारण के दौरान उस जीव की आत्मा को किन-किन  अचन्यों को सहना पड़ता है ओरिस पूरा अंतरात अर्थात 9 महीने के अंतराल में उनके मन में क्या-क्या चलता है । इनका गर्वर्णवन हमें इसी गरूड़  पुरान मिलता है 


अगर दिए हुवे जानकारी अच्छे लगे तो आप इस पोस्ट को जायदा से जायदा share kare धन्यवाद।।

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