Wednesday, 14 December 2022

मरते समय कितना दर्द होता है।मृत्यु के समय कितना दर्द होता है।marte samay kitna dard hota hai

नमस्कार दोस्तों आप सभी को स्वागत  है आज का इस New Post  के साथ जिसका title है।मरते समय कितना दर्द होता हैै।मृत्यु के समय कितना दर्द होता है।marte samay kitna dard hota hai।


मरते समय कितना दर्द होता है।मृत्यु के समय कितना दर्द होता है।marte samay kitna dard hota hai 

मृत्यु एक ऐसा विषय है। जिसके बारे में जानने की जिज्ञासा  हरेक व्यक्ति को जीवन में एक बार न एक बार होती है और मन में यह भी सवाल आता है कि मृत्यू के छान में व्यक्ति को  कैसा लगता होगा। मृत्यु का अनुभव किस  प्रकार का होता होगा। तथा मृत्यु के छन में जब आत्मा शरीर छोड़ती है। तब मरने वाले को कितना दर्द होता होगा। देखिए इस बात को सर्टिफिकेशन के हिसाब से  नहीं बताया जा सकता। 

पिछले जन्म को याद करे 

इसका कोई पैरामीटर नहीं है क्योंकि जो व्यक्ति मरने वाला होता है, तब इस अनुभव को  बता नहीं पाता।

लेकिन  प्रकृति के कुछ लो है कुछ ऐसे नियम जिनके आधार पर बताया जा सकता है। यह  इसके बारे में गरुड़ पुराण में लिखा है कि जन्म और मरण का चक्र इस प्रकार से काम करता है। 

यह सिस्टम क्या है जब व्यक्ति को मृत्यु होती है तब वह कई पड़ाव से गुजरता है कुछ लोगों की मृत्यु के समय बहुत पीड़ा होते हैं कुछ लोग सहजी अपना शरीर छोड़ देते हैं।

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सबसे पहला कैटेगरी

तो सबसे पहले जान लेते हैं 

यो व्यक्ति जिनको मृत्यु के समय सबसे ज्यादा पीड़ा होती है। वह किस कैटेगरी के होते हैं।जो वेक्ति जीवन से पूरी तरह से चिपके हुए होते हैं। यह पूरी प्रवृत्ति के हैं। ऐसे व्यक्तियों को मृत्यु के समय अधिक पीड़ा होती है क्योंकि प्रकृति कहती है की अब मृत्यू का समय आ गया है। शरीर छोड़ना पड़ेगा। परंतु मरने वाले व्यक्ति ने समाज में रहकर जो मेमोरी इक्कठी की है, उसने जो भी कुछ जुड़ा है वह उसे छोड़ना नहीं  चहता है  वे जो धन दौलत  रिश्ते नाते समाज के पूरी तरह से जुड़ा हुआ है। अब जो चीज़ मजबूती से जुड़ी हुई है यो इतनी आसानी से नही छूटेगी उसे छुड़ाने के लिए अधिक फोर्स  लगाना होगा। 

दोस्तो जब कहते हैं कि मरते समय जब जीव को यमदूत लेने आते हैं तब उसे इस शरीर से बाहर निकालने का प्रयास करते हैं। परंतु है तो शरीर छोड़ना नहीं चाहता। उसके  मुताबिक भोगने के लिए बहुत कुछ बाकी रह गया है जो शरीर में रहकर ही भोगा  जा सकता है। तब वह शरीर जोर से पकड़ लेता है और दूसरी तरफ से फोर्स लगता है। 

जीव  को शरीर से बाहर निकालने का और उसी फोर्स की वजह से उस व्यक्ति को  अधिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है और उसके कर्मों के अनुसार यानी उसने जो कर्म संस्कार जमा की है। उसके मुताबिक उसको उस लोग में ले जाया जाता है


थोड़ा समय बिताने के बाद उसे आपस से ही पृथ्वी पर लाया जाता है।  जहा वे फिर से अपने संस्कारों को पूरा करने के लिए शरीर को धारण कर लेता है। इसको आप ऐसे भी समझ सकते है । इतने जायदा यधर्मी लोग आप  अपने आसपास देखते  हैं। जिन्हे आप बुरे लोग भी कह  सकते है यह  सभी इस फिजिकल वर्ल्ड से , पूरी तरह से कनेक्ट है 


यह भासन्यो को छोड़ नही पाते है एक भासना भोंकते हैं दूसरी उठ खड़ी होती है इसी तरह से उसकी भासनाए एक जन्म पूरी नही होती और उन्हें बार बार आना पड़ता है और बार-बार मृत्यु की पीड़ा उठानी पड़ती है।

 

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दूसरी कैटेगरी

जब एक योगी  सन्यासी आत्मा ज्ञानि अपना  शरीर त्यागता है तब उसे इतना ज्ञान मिल जाता है कि उसे यह सब कुछ समझ में आ जाता है। संसार व्यर्थ है, संसार दुखों का करण है वह जान लेता है किंतु ना जानें  कितनी बार इस मृत्यू लोग यानि पृथ्वी पर  आ चुका है 

और रिपीटली सब कुछ जमा  करता है और सब यहीं छूट जाता है। उसे संसार की व्यथा का पता लग जाता है सगे संबंधी रिश्ते नाते। यह सब उसे नाटक खेल समझने लगता है। तब  ऐसा व्यक्ति मृत्यु को छन में विरोध  नहीं करता है। मृत्यु के टूथ जब उसकी  पास आते है उसकी आत्मा को लेने तब वे सावाविक भाव से    शरीर से निकलकर उनके साथ चलने के लिए तैयार हो जाता है। 

ऐसे सादक के आत्मा को उसे जबरजस्ती खींचना नही पड़ता वा विरोध है ही नही जेसे एक नारियल जब वह सुख जाता है तब यो अपने ऊपरी खोल को सतही छोड़ देता है पेड़ में लगा फल जब पक जाता है यो सतेहे ही  बिना पीड़ा के टूट जाता है।

कच्चा फल तोड़ोगे तो फल और वृक्ष को पीड़ा उठानी पड़ेगी। 

क्या होता है जिसकी कामवासना कभी पूरी नहीं हो पाती। कच्चे फल की बात भी होता है और उसे टूटते समय यानी शरीर छोड़ते समय पीड़ा उठानी पड़ती है। जोगी सन्यासी स्वर ज्ञान को प्राप्त व्यक्तियों को छोड़ता है। उसके कर्मों के अनुसार जमा किया। समाज की सेवा की है। कोई गलत काम नहीं किया है। उसके मुताबिक उसे लोक मिल जाता है जहां उसे  किसी भी प्रकार की पीड़ा नहीं भोगनी पड़ती है कुछ समय  रहने के बाद  यो चाहे तो पृथ्वी पर वापस या सकता है ।

और मानव जाति को ज्ञान दे सकता है महापरिनिर्वाण प्राप्त कर सकता है जहा से वापसी  का कोई उपाय नहीं। अब बात आती है कि दूसरे लोगों में आत्मा कितना समय बिताती है। देखिए जब एक साधारण व्यक्ति मारता है, तब  उसे तुरंत अगला जन्म मिल  जाता है। 

दुसरे लोग में कितना समय देता है उस समय का कोई अंदाजा नहीं लगा सकता क्योंकि जिस समय को हम जानते हैं यह पृथ्वी के मुताबिक है  क्योंकि यह एक मया है यह असल समय नही है हरेक अयम में अगल अलग समय है अब सही समय क्या है और सात क्या इसके बरे मे बताया जा सकता है क्युकी आप जब सपनो में होते हो यानी एक अलग यौयम मे तब सपन का समय अलग होता हैं  वहा पर एक सपना मात्र कुछ सेकंड का  होता है और उन कुछ सेकंड में  आप इस समय के हिसाब से आप इस समय के हिसाब से बहुत लम्बा जीवन जी लेते हैं 

अगर आप अपने सपने को बताने के लिए बैठोगे तो बहुत ज्यादा लंबा समय लगेगा जो जो सपना अपने सपने में कुछ सेकंड के लिए देखा होगा  मैं का कांसेप्ट इतनी आसानी से नहीं समझाया जाता। यह अलग अलग लोगों में अलग अलग सपने आते हैं

अब आप लोगों के मन में सवाल आ रहा होगा कि यह सब बातें मैं कैसे जानता हूं

देखिए जब एक धयानी ध्यान करता है और वह गहरे ध्यान चला जाता है। अगर ऐसा  सादक गहरे ध्यान में जाने से पहले सवाल लेके जय तब उससे सवाल का जवाब गहरे ध्यान मिल जाता है

वेद पुराणों में लिखी गई सभी बातें भगवान ईश्वर ने नहीं लिखी। वेद पुराणों में लिखा सभी ज्ञान साधकों को गहरे ध्यान मिलते जिसे व समृद्ध करके किताबों में लिख देता है ताकी इससे  मानव जाति का कल्याण हो सके और उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सके।

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